Rahim Das Ke Dohe In English and Hindi With Images | रहीम के दोहे

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Abdul Rahim Khan-e-Khana aka Baba Rahim Das

Rahim  Ke  Dohe:हम सब  जानते है की बाबा रहीम एक सुप्रसिद्ध  मध्यकालीन कवि थे और वो रहीम के दोहे के लिए जाने जाते है | लेकिन रहीम कवी होने के साथ साथ अकबर के एक( Navaratnas ) नवरत्न भी थे|  यानी वो  अकबर के देवन भी थे |इसके  अलावा रहीम एक प्रतिभावंत  भी थे जिनमे  बहुत सारी प्रतिभाएं थी जैसे की वो एक  कूटनीतिज्ञ, सेनापति, प्रशासक, दानवीर, बहुभाषाविद, कलाप्रेमी, आश्रयदाता भी थी |

रहीम जी का जीवनी

बाबा रहीम का पूरा नाम अब्दुल रहीम ख़ान-ए-ख़ाना है | उनका जन्म  संवत्(17 December 1556 – 1627)  मे खानखाना  में हुवा जो की  नवांशहर जिल्ला में हुवा जो की अब पंजाब राज्य  है | यहाँ गांव  का नाम उनके नाम पे ही रखा गया था | रहीम जी का पिता का नाम  बैरम खान था जो की अकबर के गुरु व  अभिभावक थे.बैरम खाँ खान-ए-खाना की उपाधि से सम्मानित थे| 

उनके बाल्य दिवस में ही उनके पिताजी का हत्या होगया था इसी कारण  अकबर ने रहीम  पालन पोषण  की जिम्मेदारी लेनी पड़ी ||  आगे चलते अकबर ने उनका विवाह अपनी धाय की बेटी माहबानो व (MoonLady) से कराया|यहाँ रोचक बात ये थी की   पत्निया थे बैटराम खान के मृत्यु के बाद रहीम की सौतेली माँ सलीमा सुल्तान बेगम ने अकबर से विवाह किया और  चौथी पत्नी बानी| इसके चलते अकबर ने रहीम को खान-ए-खाना की उपाधि से सम्मानित किया।इनको अकबर ने  अपने समय की सर्वोच्च उपाधि ‘मीरअर्ज’ से रहीम को विभूषित किया।

प्रमुख घटना

रहीम के जवान की प्रमुख घटना | एक बार  राणा प्रताप रहीम के महिलाओ को बचाकर सही लौटा दिया इस घटना के चलते रहीम  कृष्णा के भक्त  बने  और उनके बारे में लेख लिखना शुरू करदिया जो  की रहीम के दोहे के रूम में जानते है |

रहीम हमेशा  सभी धर्म के गरीबो को दान देते थे वो  गुण को को  संत तुलसीदास ने अपने एक दोहे में बताया

इस तरह से भिक्षा क्यों देते हो? यह आपने कहाँ सीखा? आपके हाथ उतने ही ऊँचे हैं जितने आपकी आँखें नीची हैं

तुलसीदास

 

जिसका अर्थ ये होता है:

इस तरह से भिक्षा क्यों देते हो? यह आपने कहाँ सीखा? आपके हाथ उतने ही ऊँचे हैं जितने आपकी आँखें नीची हैं

रहीम के प्रमुख रचनाये

  • रहीम दोहावली,
  • बरवै,
  • नायिका भेद,
  • मदनाष्टक,
  • रास पंचाध्यायी,
  • नगर शोभा आदि।

रहिक द्वारा  लिखे गए किताबे

  • खेटकौतुकम्
  • द्वात्रिंशद्योगावली

सन १६२७ में उनका मृत्य होगया था उनको अपने पत्नी के मकबरा ,में  दफ़न किया गया जो की सन 1598 में बनाया गया था अभी वो अब्दुल रहीम खानखाना का मकबरा के  नाम से जाना जाता है|

ये थी रहीम दस का जीवनी| अभी हम चलते है रहीम जे के दोहे की तरफ.रहीम जे ने अपने जीवन काल में लगभग सभी विषयो पर दोहे लिखे है उन दोहे में से हमने प्रमुख दोहे को यहाँ आपके सामने Rahim Ke Dohe के रूम में प्रस्तुत किया है|

यहाँ हमने सबसे पहले रहीम के दोहे का चित्र (Rahim Ke Dohe With Images) दिया है जसिमे हमने दोहा लिखा है उसके बाद रहीम जे का हिंदी दोहा(Rahim Ke Dohe in Hindi) लिखा है और अंत में रहीम के दोहे  अंग्रेजी भाषा (Rahim Ke Dohe In English) में लिखा है |

 

रहीम के दोहे | Rahim Ke Dohe

समय पाय फल होत है, समय पाय झरी जात 

सदा रहे नहिं एक सी, का रहीम पछितात |

“samay paay phal hot hai, samay paay jharee jaat |

sada rahane vaalein ek see, ka raheem pachhitaat |

Rahim ke dohe about time in Hindi


“जैसी परे सो सहि रहे, कहि रहीम यह देह |

धरती ही पर परत है, सीत घाम औ मेह |”

“jaise so sahi rahe, kahi raheem yah deh |

dharatee hee par parat hai, seet ghaam au meh | “

 

Rahim Das Ke Dohe hindi me


रहिमन देख बड़ेन को, लघु न दीजिये डारि |
जहाँ काम आवै सुई, कहा करै तलवार |”

rahiman dekh baden ko, laghu na de daari |

jahaan kaam aavai soon, kaha karai talavaar |

Rahim ke dohe about power


 

Rahim ke dohe about prayer

दुःख में सुमिरन सब करे, सुख में करे न कोय ।
जो सुख में सुमिरन करे, तो दुःख काहे होय ।

duhkh mein sumiran sab kare, sukh mein kare nok.

jo sukh mein sumiran kare, to duhkh kaahe hoy


“जैसी परे सो सही रहे, कही रहीम यह देह।

धरती ही पर परत हैं, सित घाम औ मेह।”

“jaise so ke sahee hone se, kahee raheem yah deh.

dharatee hee par parat hain, see ghaam au meh

Rahim ke dohe about earth


रहिमन देखि बड़ेन को, लघु न दीजिए डारि ।
जहां काम आवे सुई, कहा करे तरवारि ।

rahiman dekhi baden ko, laghu na krpa daari.

jahaan kaam aave sueet, kaha kare taravaari.

Rahim ke dohe about size


खीर सिर ते काटी के, मलियत लौंन लगाय।

रहिमन करुए मुखन को, चाहिये यही सजाय।”

kheer sir te kaatee ke, malit launn lagaay.

rahiman karue mukhan ko, chaahie sajag.

Rahim ke dohe _रहीम के दोहे


 

“खैर, खून, खाँसी, खुसी, बैर, प्रीति, मदपान.

रहिमन दाबे न दबै, जानत सकल जहान |”

“khair, khoon, khaansee, khusee, bair, preeti, ghata.

rahiman daabe na dabai, jaanat sakal jahaan |

Rahim ke dohe about health _रहीम के दोहे


“जो रहीम ओछो बढै, तौ अति ही इतराय |

प्यादे सों फरजी भयो, टेढ़ों टेढ़ों जाय |”

“jo raheem ochho badhaee, ta ati hee itaraay |

pyaade son pharjee bhayo, tedhon tedhon jaana |

Rahim ke dohe _रहीम के दोहे


रहिमन धागा प्रेम का, मत तोड़ो चटकाय ।
टूटे पे फिर ना जुड़े, जुड़े गांठ परी जाय ।

rahiman dhaaga prem ka, mat todo chatakaay .

toote pe phir na jude, jude gaanth paree jaay .

Rahim ke dohe about love _रहीम के दोहे प्रेम


 

“रहिमन अंसुवा नयन ढरि, जिय दुःख प्रगट करेड़,

जाहि निकारौ गेह ते, कस न भेद कही देई।

rahiman ansuva nayan dhari, jiy duhkh pragat kared,

jaahi nikaarau geh te, kas na bhed kahee deee

Rahim ke dohe 6_रहीम के दोहे


रूठे सुजन मनाइए, जो रूठे सौ बार ।
रहिमन फिरि-फिरि पोइए, टूटे मुक्ताहार ।

Roothe sujan Manaie, jo Roothe sau baar .

rahiman phiri-phiri poie, toote muktaahaar .

 

Rahim ke dohe 7_रहीम के दोहे


“रहिमन निज मन की बिथा, मन ही राखो गोय।

सुनी इठलैहैं लोग सब, बांटी लैहैं कोय।”

rahiman nij man kee bitha, man hee raakho goy.

sunee ithalaihain log sab, baantee laihain koy.”

Rahim ke dohe 8_रहीम के दोहे


दोनों रहिमन एक से, जों लों बोलत नाहिं ।
जान परत हैं काक पिक, रितु बसंत के माहिं ।

donon rahiman ek se, jon lon bolat naahin .

jaan parat hain kaak pik, ritu basant ke maahin .

Rahim ke dohe 10_रहीम के दोहे


बानी ऐसी बोलिये, मन का आपा खोय ।
औरन को सीतल करै, आपहु सीतल होय ।

baanee aisee boliye, man ka aapa khoy .

auran ko seetal karai, aapahu seetal hoy .

Rahim ke dohe about people_रहीम के दोहे


“छिमा बड़न को चाहिये, छोटन को उतपात।

कह रहीम हरी का घट्यौ, जो भृगु मारी लात।”

“chhima badan ko chaahiye, chhotan ko utapaat.

kah raheem haree ka ghatyau, jo bhrgu maaree laat.”

 

रहीम के दोहे

Rahim Ke Dohe In English and Hindi

रहीम उत्तम प्रकृति, का करी सकत कुसंग ।
चन्दन विष व्यापत नहीं, लिपटे रहत भुजंग ।

jo raheem uttam prakrti, ka karee sakat kusang .

chandan vish vyaapat nahin, lipate rahat bhujang .

Rahim ke dohe about friendship के दोहे


वे रहीम नर धन्य हैं, पर उपकारी अंग ।
बांटन वारे को लगे, ज्यों मेंहदी को रंग ।

ve raheem nar dhany hain, par upakaaree ang .

baantan vaare ko lage, jyon menhadee ko rang .

Rahim ke dohe upkaar_रहीम के दोहे उपकार


खीरा सिर ते काटि के, मलियत लौंन लगाय ।
रहिमन करुए मुखन को, चाहिए यही सजाय ।

kheera sir te kaati ke, maliyat launn lagaay .

rahiman karue mukhan ko, chaahie yahee sajaay .

Rahim ke dohe 12_रहीम के दोहे


रहिमन अंसुवा नयन ढरि, जिय दुःख प्रगट करेइ ।
जाहि निकारौ गेह ते, कस न भेद कहि देइ ।

rahiman ansuva nayan dhari, jiy duhkh pragat karei .

jaahi nikaarau geh te, kas na bhed kahi dei .

Rahim ke dohe 12_रहीम के दोहे (1)


रहिमन निज मन की बिथा, मन ही राखो गोय ।
सुनी इठलैहैं लोग सब, बांटी न लेंहैं कोय ।

rahiman nij man kee bitha, man hee raakho goy .

sunee ithalaihain log sab, baantee na lenhain koy .

Rahim ke dohe 13_रहीम के दोहे


तरुवर फल नहीँ खात हैं, सरवर पियहि न पान ।
कही रहीम पर काज हित, संपति संचही सुजान ।

taruvar phal naheen khaat hain, saravar piyahi na paan .

kahee raheem par kaaj hit, sampati sanchahee sujaan .

Rahim ke dohe about selflessness_रहीम के दोहे निस्सवार्थता


रहिमन विपदा हू भली, जो थोरे दिन होय ।
हित अनहित या जगत में, जान परत सब कोय ।

rahiman vipada hoo bhalee, jo thore din hoy .

hit anahit ya jagat mein, jaan parat sab koy .

Rahim ke dohe 14_रहीम के दोहे


बड़ा हुआ तो क्या हुआ, जैसे पेड़ खजूर ।
पंथी को छाया नहीं, फल लागे अति दूर ।

bada hua to kya hua, jaise ped khajoor .

panthee ko chhaaya nahin, phal laage ati door .

Rahim ke dohe use _रहीम के दोहे उपयोग


“जो रहीम ओछो बढै, तौ अति ही इतराय।

प्यादे सों फरजी भयो, टेढ़ों टेढ़ों जाय।”

“jo raheem ochho badhai, tau ati hee itaraay.

pyaade son pharajee bhayo, tedhon tedhon jaay.”

रहीम के दोहे

रहिमन चुप हो बैठिये, देखि दिनन के फेर ।
जब नीके दिन आइहैं, बनत न लगिहैं देर ।

rahiman chup ho baithiye, dekhi dinan ke pher .

jab neeke din aaihain, banat na lagihain der .

Rahim ke dohe about days _रहीम के दोहे दिन


“जे गरिब पर हित करैं, हे रहीम बड |

कहा सुदामा बापुरो, कृष्ण मिताई जोग |”

“je garib par hit karain, he raheem bad |

kaha sudaama baapuro, krshn mitaee jog |”

Doha about poor _रहीम के दोहे दिन गरीब

“चाह गई चिंता मिटीमनुआ बेपरवाह।

जिनको कुछ नहीं चाहिये, वे साहन के साह।”

“chaah gaee chinta miteemanua beparavaah.

jinako kuchh nahin chaahiye, ve saahan ke saah.”

Rahim ke dohe रहीम के दोहे चिंता

मन मोटी अरु दूध रस, इनकी सहज सुभाय ।
फट जाये तो न मिले, कोटिन करो उपाय ।

man motee aru doodh ras, inakee sahaj subhaay .

phat jaaye to na mile, kotin karo upaay .

रहीम के दोहे उपाय

Rahim Ke Dohe For 8 and 9 class

बिगड़ी बात बने नहीं, लाख करो किन कोय ।
रहिमन फाटे दूध को, मथे न माखन होय ।

bigadee baat bane nahin, laakh karo kin koy .

rahiman phaate doodh ko, mathe na maakhan hoy .

के दोहे (1)

“रहिमन धागा प्रेम का, मत टोरो चटकाय।

टूटे पे फिर ना जुरे, जुरे गाँठ परी जाय” .

“rahiman dhaaga prem ka, mat toro chatakaay.

toote pe phir na jure, jure gaanth paree jaay” .

Rahim ke dohe dhaaga

मय पाय फल होता हैं, समय पाय झरी जात।

सदा रहे नहीं एक सी, का रहीम पछितात।”

may paay phal hota hain, samay paay jharee jaat.

sada rahe nahin ek see, ka raheem pachhitaat.”

Rahim ke ekta doha

जैसी परे सो सहि रहे, कहि रहीम यह देह ।
धरती ही पर परत है, सीत घाम औ मेह ।

jaisee pare so sahi rahe, kahi raheem yah deh .

dharatee hee par parat hai, seet ghaam au meh .

रहीम दोहा

ओछे को सतसंग रहिमन तजहु अंगार ज्यों ।
तातो जारै अंग सीरै पै कारौ लगै ।

ochhe ko satasang rahiman tajahu angaar jyon .

taato jaarai ang seerai pai kaarau lagai .

Rahim ke dohe _रहीम के दोहे

रहिमन मनहि लगाईं कै, देख लेहूँ किन कोय ।
नर को बस करिबो कहा, नारायण बस होय ।

rahiman manahi lagaeen kai, dekh lehoon kin koy .

nar ko bas karibo kaha, naaraayan bas hoy .

Rahim ke dohe _रहीम के दोहे (5)

 

“जो रहीम गति दीप की, कुल कपूत गति सोय।

बारे उजियारो लगे, बढे अंधेरो होय।”

“jo raheem gati deep kee, kul kapoot gati soy.

baare ujiyaaro lage, badhe andhero hoy.

Rahim ke dohe _रहीम के दोहे

“दोनों रहिमन एक से, जों लों बोलत नाहिं।

जान परत हैं काक पिक, रितु बसंत के नाहिं”

“donon rahiman ek se, jon lon bolat naahin.

jaan parat hain kaak pik, ritu basant ke naahin”

Rahim ke dohe_रहीम के दोहे

जो बड़ेन को लघु कहें, नहीं रहीम घटी जाहिं ।
गिरधर मुरलीधर कहें, कछु दुःख मानत नाहिं ।

jo baden ko laghu kahen, nahin raheem ghatee jaahin .

giradhar muraleedhar kahen, kachhu duhkh maanat naahin .

Rahim ke dohe_रहीम के दोहे (1)

“रहिमन वे नर मर गये, जे कछु मांगन जाहि।

उतने पाहिले वे मुये, जिन मुख निकसत नाहि।”

“rahiman ve nar mar gaye, je kachhu maangan jaahi.

utane paahile ve muye, jin mukh nikasat naahi.”

 

Rahim ke dohe_रहीम के दोहे (2)

“रहिमन ओछे नरन सो, बैर भली न प्रीत |
काटे चाटे स्वान के, दोउ भाँती विपरीत |”

“rahiman ochhe naran so, bair bhalee na preet |

kaate chaate svaan ke, dou bhaantee vipareet |”

 

Rahim jee ka doha

“एकहि साधै सब सधैए, सब साधे सब जाय |

रहिमन मूलहि सींचबोए, फूलहि फलहि अघाय |”

“ekahi saadhai sab sadhaie, sab saadhe sab jaay |

rahiman moolahi seenchaboe, phoolahi phalahi aghaay |”

Rahim ke dohe_रहीम के दोहे

“रहिमन विपदा हु भली, जो थोरे दिन होय |

हित अनहित या जगत में, जान परत सब कोय |”

“rahiman vipada hu bhalee, jo thore din hoy |

hit anahit ya jagat mein, jaan parat sab koy |”

Rahim ke dohe_रहीम के दोहे (5)

“बिगरी बात बने नहीं, लाख करो किन कोय |

रहिमन फाटे दूध को, मथे न माखन होय |”

“bigaree baat bane nahin, laakh karo kin koy |

rahiman phaate doodh ko, mathe na maakhan hoy |”

Rahim ke dohe_रहीम के दोहे (6)

“रहिमन’ पैड़ा प्रेम को, निपट सिलसिली गैल |

बिलछत पांव पिपीलिको, लोग लदावत बैल |”

“rahiman’ paida prem ko, nipat silasilee gail |

bilachhat paanv pipeeliko, log ladaavat bail |”

Rahim ke dohe_रहीम के दोहे (7)

“मथत-मथत माखन रहे, दही मही बिलगाय |

‘रहिमन’ सोई मीत है, भीर परे ठहराय |”

“mathat-mathat maakhan rahe, dahee mahee bilagaay |

‘rahiman’ soee meet hai, bheer pare thaharaay |”

रहीम जी का दोहा

“रहिमन’ वहां न जाइये, जहां कपट को हेत |

हम तो ढारत ढेकुली, सींचत अपनो खेत |”

“rahiman’ vahaan na jaiye, jahaan kapat ko het |

ham to dhaarat dhekulee, seenchat apano khet |”

 

रहीम जी का दोहा

“रहिमन पानी राखिये, बिन पानी सब सुन |

पानी गये न ऊबरे, मोटी मानुष चुन |”

“rahiman paanee raakhiye, bin paanee sab sun |

paanee gaye na oobare, motee maanush chun |”

रहीम जी का पानी दोहा

“पावस देखि रहीम मन, कोईल साढ़े मौन |

अब दादुर वक्ता भए, हमको पूछे कौन |”

“paavas dekhi raheem man, koeel saadhe maun |

ab daadur vakta bhe, hamako poochhe kaun |”

 

रहीम जी का दोहा मन

“रूठे सृजन मनाईये, जो रूठे सौ बार।

रहिमन फिरि फिरि पोईए, टूटे मुक्ता हार।”

“roothe srjan manaeeye, jo roothe sau baar.

rahiman phiri phiri poeee, toote mukta haar.”

 


जे गरिब सों हित करें, ते रहीम बड़ लोग ।
कहा सुदामा बापुरो, कृष्ण मिताई जोग ।

je garib son hit karen, te raheem bad log .

kaha sudaama baapuro, krshn mitaee jog .

रहीम जी का दोहाये है हमारा रहीम के दोहे Rahim  ke  Dohe का संग्रह अगर हमारे से दोहे लिखने में कोई गलती हो गयी हो तो हमें comments सेक्शन में जरूर बताये और अगर आपके पास और भी रहीम के दोहे है तो हमें comments  में बताये

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